कार्यक्रम/योजनाएं
- नई पहलें(279 KB)

- कृषि ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना, 2008 संबंधी बैंक-वार आंकड़े(213 KB)

- बैंकिंग ओम्ब ड्समैन योजना, 2006(425 KB)

- कृषि ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना, 2008(504 KB)

लदान-पूर्व एवं लदान-पश्चा0त् निर्यात ऋण पर ब्याीज सहायता
भारत सरकार ने रोजगारोन्मुख निर्यात क्षेत्रों को वैश्विक मंदी से बचाने के उद्देश्यत से निर्णय लिया है कि सात रोजगारोन्मुख निर्यात क्षेत्रों अर्थात् वस्त्रं (हथकरघा-सहित), हस्तशिल्प, कालीन, चमड़ा, रत्नक एवं आभूषण, समुद्री उत्पा दों और एसएमई क्षेत्रके लिए लदान-पूर्व एवं लदान-पश्चामत् ऋण पर दिनांक 01.12.2008 से 31 मार्च, 2010 तक 2% की ब्या ज सहायता दी जाए। इसके अतिरिक्त , सरकार ने कुछ रोजगारोन्मु2ख निर्यात क्षेत्रों अर्थात् हस्ततशिल्पे, कालीन, हथकरघा और छोटे एवं मझौले उद्यमों (एसएमई) के लिए लदान-पूर्व एवं लदान-पश्चातत् रुपया ऋण पर 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2011 तक 2 प्रतिशत अंकों की ब्यानज सहायता दी है।
भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए सहायता दी जाएगी। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक 270 दिन तक के लदान पूर्व ऋण तथा 180 दिन तक के लदान-पश्चाात् ऋण पर जो ब्याज-दर प्रभारित करते हैं, वह बीपीएलआर से 2.5 प्रतिशत घटाकर जो राशि बनेगी, उससे अधिक नहीं होगी। दिनांक 01.12.2008 और इसके बाद सहायता लागू होने तक बैंकों को 270 दिन तक के लदान-पूर्व ऋण पर और 180 दिन तक के लदान-पश्चाैत् ऋण पर इन क्षेत्रों में बकाया राशि पर अधिकतम बीपीएलआर से 4.5 प्रतिशत राशि घटाकर ब्याज दर प्रभारित करनी है। तथापि, कुल सहायता इस शर्त के अध्य5धीन दी जाएगी कि सहायता के बाद ब्या ज दर 7 प्रतिशत से कम नहीं होगा, जो कि प्राथमिकता क्षेत्र उधार के तहत कृषि क्षेत्र के लिए लागू दर है। बैंकों से यह सुनिश्चोत करने की अपेक्षा की जाती है कि पात्र निर्यातकों को 2 प्रतिशत की सहायता का लाभ पूर्णरूप से प्राप्त हो।





