पूंजी बाजार सुधार
हाल ही में भारत में प्रतिभूति बाजार के भारतीय विनियामक और पर्यवेक्षी ढांचे को विधायी और प्रशासनिक उपायों के जरिए पर्याप्तत रूप से सुदृढ़ किया गया है। प्रतिभूति बाजार का विनियामक ढांचा सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्री य मानकों यथा अंतर्राष्ट्री़य प्रतिभूति आयोग संगठन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है। हाल ही में किए गए पूंजी बाजार सुधार और सुधारों के लिए एक कार्यसूची नीचे दी गई है।
- व्यापक स्तर पर पूंजी बाजार सुधार 1990 के दशक के वर्षों में शुरू किए गए थे जिनमें विनियामक और संस्थागत सुधार समिलित थे । सांविधिक बाजार विनियामक 1992 में स्थापित किया गया था । इसे सामूहिक निवेश योजनाओं और बागान योजनाओं को विनियमित करने के लिए 1999 में एक संशोधन के माध्यम से समुचित रूप से सशक्त किया गया था। इसके अतिरिक्ता, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के संगठनात्मक सुद्ढीक़रण तथा तलाशी लेने एंव जब्त करने की शक्तियों सहित अनुपालन व प्रर्वतनकारी शक्तियां देकर उपयुक्त ढंग से सशक्त किया गया । यह कार्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम में 2002 में संशोधन करके किया गया था । यद्यपि, इलैक्ट्रोनिक बुक कीपिंग के लिए कानूनी आधार प्रदान करने के बाद, 1997 में ही अभौतिकीकरण शुरू किया जा सका तथा निक्षेपागारों का सृजन हुआ, विनियामक क्रमश: यह अधिदेश दिया गया कि अधिकांश स्टॉकों में व्यापार इलैक्ट्रोनिक रूप में ही किया जाए
- सन् 2001 तक भारत ही एकमात्र परिष्कृरत बाजार था जिसमें व्युकत्परन्ना उत्पासदों के साथ-साथ लेखावधि निपटान किया जाता था। सन 2001 के मध्य से, एक समान चल निपटान और समान निपटान चक्र निर्धारित किए गए जिससे एक वास्तविक हाजिर बाजार का उदय हुआ ।
- सन 1999 में एससीआरए में संशोधन करके व्युत्पन्न व्यापार के लिए कानूनी ढांचे की व्यवस्था हो जाने के बाद, व्युत्पन्न व्यापार क्रमिक रूप से शुरू होने लगा और स्टाक सूचकांक भावी सौदे जून 2000 में शुरू किए गए । बाद में, विकल्प और एकल स्टाक संबंधी भावी सौदों की शुरूआत 2000-01 में हुई और अब भारत के व्युत्पन्न बाजार का कुल कारोबार नकद बाजार से अधिक है तथा भारत विश्व के सबसे बड़े सर्वाधिक एकल स्टाक भावी सौदा बाजारों में से एक है ।
- भारत की जोखिम प्रबंधन प्रणालियां सदैव ही बहुत आधुनिक एवं प्रभावी रही हैं । जोखिम-मूल्य आधारित मार्जिन सिस्टम की शुरूआत 2001 के मध्य में की गयी और जोखिम प्रबंधन प्रणालियों ने मई 2003 और मई 2004 में हुए अत्यधिक उतार-चढावों का सामना किया । इसमें तत्काल जोखिम मानीटरिंग, दलाल टर्मिनलों का अक्रियकरण जोखिम मूल्य आधारित मार्जिन आदि को शामिल किया गया ।
- भारत उन कुछेक देशों में एक है जिन्होंहने जनवरी 2003 से सरकारी प्रतिभूतियों का स्क्रीन आधारित व्यापार करना शुरू कर दिया है ।
- जून 2003 में, स्क्रीन आधारित व्यापार प्लेटफॉर्म पर ब्याज दर भावी सौदों की शुरूआत की गयी ।
- भारत उन कुछेक देशों में एक देश है जिसने सीधी पारगमन क्रियाविधि शुरू की है । इससे शेयर बाजार संबंधी आदेश प्रवाह एवं समाशोधन और व्यवस्थापन की प्रक्रिया पूर्णतया स्वचालित हो जाएगी ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रायोगिक आधार पर 2004 में तत्काल सकल निपटान प्रणाली शुरू की है । इससे तत्काल डिलीवरी बनाम भुगतान अनुमत हो जाएगा जो बीआईएस और आईओएससीओ द्वारा मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय मानक है।
- शेयर बाजारों को इलैक्ट्रॉनिक रूप देने और निगमीकरण करने का अधिदेश देकर शेयर बाजारों की शासन प्रणाली में सुधार करने और प्रतिभूति बाजार में निवेशकों के हित की सुरक्षा के लिए, प्रतिभूति कानून (संशोधन) अध्यादेश 12 अक्टूबर, 2004 को प्रख्यापित किया गया। अब इस अध्यादेश का स्थान विधेयक ने ले लिया है ।





